आयुर्वेद के अनुसार विरुद्ध आहार-विहार: ये 18 गलतियां बना सकती हैं रोगों का कारण

Jun 05, 2026
घरेलू नुस्खे
आयुर्वेद के अनुसार विरुद्ध आहार-विहार: ये 18 गलतियां बना सकती हैं रोगों का कारण

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वाद और सुविधा के लिए कई ऐसे खाद्य पदार्थों का एक साथ सेवन कर लेते हैं, जिन्हें आयुर्वेद में "विरुद्ध आहार" कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थ और जीवनशैली की आदतें एक-दूसरे के विपरीत प्रभाव वाली होती हैं। इनका लगातार सेवन शरीर में विषैले तत्व (आम), पाचन विकार, त्वचा रोग, मोटापा, एलर्जी तथा कई अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।

आइए जानते हैं आयुर्वेद द्वारा बताए गए ऐसे 18 विरुद्ध आहार-विहार, जिनसे स्वस्थ रहने के लिए बचना चाहिए।


क्या होता है विरुद्ध आहार?

आयुर्वेद में ऐसे भोजन या आदतों को विरुद्ध आहार-विहार कहा जाता है, जो शरीर के दोषों (वात, पित्त और कफ) को असंतुलित करते हैं तथा पाचन शक्ति को कमजोर बनाते हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने से रोग उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।


आयुर्वेदानुसार 18 विरुद्ध आहार-विहार

1. दूध के साथ खट्टे फल या पदार्थ

दूध के साथ नींबू, संतरा, मौसंबी, अनार जैसे खट्टे फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे पाचन संबंधी समस्याएं और अम्लता बढ़ सकती है।

2. दूध और नमक का संयोजन

दूध के साथ नमकीन पदार्थ या कुलत्थ (कुल्थी दाल) का सेवन आयुर्वेद में अनुचित माना गया है।

3. मूली, लहसुन या हरी सब्जियां खाने के तुरंत बाद दूध

मूली, लहसुन अथवा कुछ हरे शाक खाने के बाद दूध पीने से त्वचा विकार और पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

4. शहद, दही और शराब का एक साथ सेवन

इन तीनों का एक साथ सेवन शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

5. सुरा, खिचड़ी और खीर का संयुक्त सेवन

आयुर्वेद में इस प्रकार के मिश्रण को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है।

6. समान मात्रा में शहद और घी

शहद और घी को समान मात्रा में मिलाकर खाना आयुर्वेद में विरुद्ध आहार माना गया है। इसी प्रकार शहद के साथ वसा, तेल या गर्म पानी का सेवन भी अनुचित बताया गया है।

7. गर्म और ठंडे खाद्य पदार्थ एक साथ

गर्म चाय के साथ ठंडी आइसक्रीम, गर्म भोजन के साथ बर्फ वाला पेय आदि का सेवन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है।

8. कच्चे और पके फलों का एक साथ सेवन

कच्चे और पके हुए फलों का मिश्रित सेवन पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

9. नए और पुराने अनाज एक साथ

नए और पुराने गेहूं, चावल या चने को एक साथ मिलाकर सेवन करना आयुर्वेद में उचित नहीं माना गया है।

10. मूली की सब्जी और मक्खन

मूली के शाक के साथ मक्खन का सेवन विरुद्ध आहार की श्रेणी में रखा गया है।

11. अंकुरित अनाज और दही

अंकुरित गेहूं, चने या चावल के साथ दही का सेवन कुछ व्यक्तियों में पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है।

12. अधिक गर्मी लगने पर तुरंत ठंडे पानी से स्नान

धूप या अत्यधिक गर्मी से आने के तुरंत बाद ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

13. अत्यधिक थकान के तुरंत बाद भोजन

बहुत अधिक थकान होने पर तुरंत भारी भोजन करने से पाचन शक्ति प्रभावित हो सकती है।

14. तले हुए भोजन के बाद ठंडा पानी

तले-भुने खाद्य पदार्थ खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीना पाचन के लिए हानिकारक माना गया है।

15. फ्रिज में लंबे समय से रखा बासी भोजन

कई दिनों तक रखा हुआ भोजन, पेय पदार्थ या बासी खाद्य सामग्री स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

16. खुले में रखे कटे फल और जूस

कटे हुए फल, खुले में रखा जूस तथा लंबे समय तक रखी हुई सब्जियों का सेवन संक्रमण और पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है।

17. आवश्यकता से अधिक भोजन

अधिक भोजन करना अधिकांश रोगों की जड़ माना गया है। आयुर्वेद हमेशा संतुलित मात्रा में भोजन करने की सलाह देता है।

18. उबालकर और छानकर पानी पीना

आयुर्वेद के अनुसार पानी को उबालकर, छानकर और ठंडा करके पीना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी माना गया है।


विरुद्ध आहार से होने वाले संभावित नुकसान

  • अपच और गैस
  • कब्ज की समस्या
  • त्वचा रोग
  • एलर्जी
  • मोटापा
  • कमजोरी और थकान
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
  • वात, पित्त और कफ का असंतुलन

निष्कर्ष

स्वस्थ जीवन के लिए केवल पौष्टिक भोजन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन का सही संयोजन और सही समय पर सेवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद में बताए गए विरुद्ध आहार-विहार से बचकर हम पाचन शक्ति को मजबूत बना सकते हैं और कई रोगों से दूर रह सकते हैं।

यदि आप लंबे समय से पाचन, त्वचा या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हैं, तो अपने दैनिक आहार संयोजन की जांच अवश्य करें। कई बार बीमारी की जड़ गलत खान-पान की आदतों में ही छिपी होती है।

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