गृध्रसी शूल (Sciatica Pain) में लाभकारी योगासन: आयुर्वेद और योग से प्राकृतिक राहत

Jun 09, 2026
बीमारियां कारण,लक्षण एवं उपचार
गृध्रसी शूल (Sciatica Pain) में लाभकारी योगासन: आयुर्वेद और योग से प्राकृतिक राहत

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक श्रम की कमी तथा गलत खान-पान के कारण कमर और पैरों में दर्द की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक प्रमुख रोग है गृध्रसी (Sciatica)। यह रोग व्यक्ति के दैनिक जीवन को अत्यंत प्रभावित करता है और कई बार चलना-फिरना भी कठिन बना देता है।

आयुर्वेद में गृध्रसी को वातजन्य रोग माना गया है। यह रोग मुख्य रूप से कमर से प्रारंभ होकर नितंब, जांघ, घुटने, पिंडली और पैरों तक दर्द उत्पन्न करता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसे Sciatica कहा जाता है, जो सायटिक नर्व (Sciatic Nerve) पर दबाव या सूजन के कारण उत्पन्न होता है।

गृध्रसी (Sciatica) क्या है?

आयुर्वेद संहिताओं में वर्णित अनुसार, जब विशेष प्रकार की पीड़ा स्फिक प्रदेश (नितंब) से प्रारंभ होकर कटि (कमर), जंघा, घुटना, पिंडली तथा पैर तक फैलती है, तो उसे गृध्रसी कहा जाता है।

चरक संहिता में गृध्रसी को वात रोगों में विशेष स्थान दिया गया है। यदि इस रोग में कफ दोष भी सम्मिलित हो जाए तो रोगी में आलस्य, तंद्रा, भारीपन और मंदाग्नि जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं, जिसे वात-कफज गृध्रसी कहा जाता है।

गृध्रसी (Sciatica) के प्रमुख कारण

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

  • वात दोष का प्रकोप
  • अत्यधिक शारीरिक श्रम
  • लंबे समय तक बैठे रहना
  • रूखा एवं वातवर्धक भोजन
  • अनियमित दिनचर्या
  • वृद्धावस्था

आधुनिक चिकित्सा के अनुसार

  • सायटिक नर्व में सूजन
  • कमर की नस पर दबाव
  • Intervertebral Disc का फटना (Slip Disc)
  • रीढ़ की हड्डी में विकार
  • मधुमेह (Diabetes)
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • मोटापा
  • गलत मुद्रा में बैठना

गृध्रसी (Sciatica) के लक्षण

  • कमर के निचले भाग में दर्द
  • नितंबों में तीव्र पीड़ा
  • जांघ से लेकर पैरों तक दर्द का फैलना
  • पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
  • चलने-फिरने में कठिनाई
  • लंबे समय तक बैठने पर दर्द बढ़ना
  • रात के समय दर्द का अधिक होना
  • पैर में कमजोरी महसूस होना

गृध्रसी शूल में योगासन का महत्व

आयुर्वेद और योग दोनों ही प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां हैं। गृध्रसी रोग में योगासन रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियों और नसों को मजबूत बनाते हैं। नियमित योगाभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है, नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है तथा दर्द में राहत मिलती है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक अवस्था में योगासन का नियमित अभ्यास कई रोगियों को दवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।

गृध्रसी शूल में लाभकारी योगासन

1. पद्मासन (Padmasana)

पद्मासन मन और शरीर को स्थिरता प्रदान करने वाला श्रेष्ठ ध्यानात्मक आसन है।

करने की विधि

  1. जमीन पर आसन बिछाकर बैठ जाएं।
  2. दोनों पैरों को सामने फैलाएं।
  3. दाएं पैर को मोड़कर बाईं जंघा पर रखें।
  4. बाएं पैर को मोड़कर दाईं जंघा पर रखें।
  5. दोनों एड़ियां नाभि के समीप रहें।
  6. दोनों हाथ घुटनों पर रखें।
  7. रीढ़ सीधी रखें तथा सामान्य श्वास लेते रहें।

लाभ

  • कमर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
  • वात दोष शांत करने में सहायक।
  • मानसिक तनाव कम करता है।
  • ध्यान एवं एकाग्रता बढ़ाता है।

2. पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)

यह आसन रीढ़ की हड्डी और पैरों की नसों को खिंचाव देकर सायटिका दर्द में विशेष लाभ पहुंचाता है।

करने की विधि

  1. दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं।
  2. एड़ियां और पंजे आपस में मिले रहें।
  3. रीढ़ सीधी रखें।
  4. दोनों हाथ ऊपर उठाएं।
  5. श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे झुकें।
  6. हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ें।
  7. माथा घुटनों से लगाने का प्रयास करें।
  8. कुछ समय इसी स्थिति में रहें।

लाभ

  • सायटिक नर्व पर दबाव कम करता है।
  • कमर दर्द में राहत देता है।
  • रीढ़ को लचीला बनाता है।
  • जांघ और पिंडली की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

3. वज्रासन (Vajrasana)

वज्रासन एक ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है।

करने की विधि

  1. दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठें।
  2. घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठ जाएं।
  3. दोनों पैर के अंगूठे आपस में मिले रहें।
  4. हाथों को घुटनों पर रखें।
  5. गर्दन और कमर सीधी रखें।
  6. सामान्य श्वास लेते रहें।

लाभ

  • कमर और पीठ को स्थिरता देता है।
  • रक्त संचार को बेहतर बनाता है।
  • पाचन शक्ति में सुधार करता है।
  • वात दोष को संतुलित करता है।

गृध्रसी रोग में अन्य उपयोगी योगासन

विशेषज्ञ की सलाह से निम्न योगासन भी किए जा सकते हैं—

  • भुजंगासन
  • मकरासन
  • शलभासन
  • सेतुबंधासन
  • अर्धमत्स्येन्द्रासन
  • पवनमुक्तासन
  • ताड़ासन

इन आसनों से रीढ़ की लचक बढ़ती है और नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

योगाभ्यास करते समय सावधानियां

  • योग हमेशा खाली पेट करें।
  • दर्द अधिक होने पर जोर न लगाएं।
  • अचानक झटके वाले अभ्यास न करें।
  • प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करें।
  • गंभीर स्लिप डिस्क या रीढ़ की समस्या होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
  • शुरुआत में 5–7 मिनट अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

आयुर्वेदिक सुझाव

गृध्रसी रोग में योग के साथ-साथ निम्न उपाय भी लाभकारी हो सकते हैं—

  • तिल के तेल से हल्की मालिश
  • वातनाशक आहार का सेवन
  • पर्याप्त नींद
  • गर्म पानी का सेवन
  • कब्ज से बचाव
  • नियमित हल्का व्यायाम

निष्कर्ष

गृध्रसी (Sciatica) एक कष्टदायक वातजन्य रोग है, जो कमर से लेकर पैरों तक तीव्र दर्द उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद और योग के समन्वित प्रयोग से इस समस्या में काफी राहत प्राप्त की जा सकती है। पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन और वज्रासन जैसे सरल योगासन नियमित अभ्यास के माध्यम से नसों को मजबूत बनाते हैं, दर्द कम करते हैं तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं। हालांकि किसी भी योगासन का चयन अपनी शारीरिक क्षमता तथा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

Recent Posts

पंचगव्य से रोग निवारण

Jun 11, 2026
आरोग्य साधन

AYURVEDIYAUPCHAR

At AyurvediyaUpchar, we are dedicated to bringing you the ancient wisdom of Ayurveda to support your journey toward holistic well-being. Our carefully crafted treatments, products, and resources are designed to balance mind, body, and spirit for a healthier, more harmonious life. Explore our range of services and products inspired by centuries-old traditions for natural healing and wellness.
आयुर्वेदीय उपचार में, हम आपको आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को समग्र कल्याण की ओर आपकी यात्रा में सहायता करने के लिए समर्पित हैं। हमारे सावधानीपूर्वक तैयार किए गए उपचार, उत्पाद और संसाधन स्वस्थ, अधिक सामंजस्यपूर्ण जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्राकृतिक उपचार और कल्याण के लिए सदियों पुरानी परंपराओं से प्रेरित हमारी सेवाओं और उत्पादों की श्रृंखला का अन्वेषण करें।

All categories
Flash Sale
Todays Deal