आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक श्रम की कमी तथा गलत खान-पान के कारण कमर और पैरों में दर्द की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं समस्याओं में से एक प्रमुख रोग है गृध्रसी (Sciatica)। यह रोग व्यक्ति के दैनिक जीवन को अत्यंत प्रभावित करता है और कई बार चलना-फिरना भी कठिन बना देता है।
आयुर्वेद में गृध्रसी को वातजन्य रोग माना गया है। यह रोग मुख्य रूप से कमर से प्रारंभ होकर नितंब, जांघ, घुटने, पिंडली और पैरों तक दर्द उत्पन्न करता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसे Sciatica कहा जाता है, जो सायटिक नर्व (Sciatic Nerve) पर दबाव या सूजन के कारण उत्पन्न होता है।
आयुर्वेद संहिताओं में वर्णित अनुसार, जब विशेष प्रकार की पीड़ा स्फिक प्रदेश (नितंब) से प्रारंभ होकर कटि (कमर), जंघा, घुटना, पिंडली तथा पैर तक फैलती है, तो उसे गृध्रसी कहा जाता है।
चरक संहिता में गृध्रसी को वात रोगों में विशेष स्थान दिया गया है। यदि इस रोग में कफ दोष भी सम्मिलित हो जाए तो रोगी में आलस्य, तंद्रा, भारीपन और मंदाग्नि जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं, जिसे वात-कफज गृध्रसी कहा जाता है।
आयुर्वेद और योग दोनों ही प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां हैं। गृध्रसी रोग में योगासन रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियों और नसों को मजबूत बनाते हैं। नियमित योगाभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है, नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है तथा दर्द में राहत मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक अवस्था में योगासन का नियमित अभ्यास कई रोगियों को दवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।
पद्मासन मन और शरीर को स्थिरता प्रदान करने वाला श्रेष्ठ ध्यानात्मक आसन है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी और पैरों की नसों को खिंचाव देकर सायटिका दर्द में विशेष लाभ पहुंचाता है।
वज्रासन एक ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह से निम्न योगासन भी किए जा सकते हैं—
इन आसनों से रीढ़ की लचक बढ़ती है और नसों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
गृध्रसी रोग में योग के साथ-साथ निम्न उपाय भी लाभकारी हो सकते हैं—
गृध्रसी (Sciatica) एक कष्टदायक वातजन्य रोग है, जो कमर से लेकर पैरों तक तीव्र दर्द उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद और योग के समन्वित प्रयोग से इस समस्या में काफी राहत प्राप्त की जा सकती है। पद्मासन, पश्चिमोत्तानासन और वज्रासन जैसे सरल योगासन नियमित अभ्यास के माध्यम से नसों को मजबूत बनाते हैं, दर्द कम करते हैं तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं। हालांकि किसी भी योगासन का चयन अपनी शारीरिक क्षमता तथा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
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