मानव मस्तिष्क प्रकृति की सबसे अद्भुत और रहस्यमयी रचनाओं में से एक है। इसकी जटिल संरचना और असाधारण कार्यक्षमता ही मनुष्य को अन्य जीवों से अलग बनाती है। संसार के सभी आश्चर्यों की तुलना में मानव मस्तिष्क कहीं अधिक विलक्षण है। यही शरीर रूपी साम्राज्य का सर्वोच्च नियंत्रक है, जो प्रत्येक क्षण शरीर के सभी अंगों और प्रणालियों का संचालन करता है।
मस्तिष्क अस्थियों से निर्मित कपाल (Skull) के भीतर सुरक्षित रहता है। शरीर की सभी ऐच्छिक (Voluntary) तथा अनैच्छिक (Involuntary) क्रियाओं का नियंत्रण इसी के हाथ में होता है। शरीर के प्रत्येक भाग से आने वाली सूचनाएँ तंत्रिकाओं (Nerves) के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचती हैं और फिर मस्तिष्क आवश्यक निर्देश देकर शरीर को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने शरीर को एक वृक्ष की उपमा दी है, जिसका मूल मस्तिष्क है और शरीर के अंग-प्रत्यंग उसकी शाखाएँ हैं।
मस्तिष्क की अद्भुत खूबियाँ
मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह एक ओर शरीर के विभिन्न अंगों को आदेश भेजता है और दूसरी ओर उनसे सूचनाएँ प्राप्त करता है।
उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति किसी हिंसक पशु को देख ले, तो आँखों से प्राप्त सूचना तुरंत मस्तिष्क तक पहुँचती है। मस्तिष्क तुरंत पैरों की मांसपेशियों को भागने का आदेश देता है। दौड़ते समय शरीर की लगभग 200 मांसपेशियाँ एक साथ कार्य करती हैं और प्रत्येक मांसपेशी को प्रति सेकंड कई बार निर्देश प्राप्त होते हैं।
दौड़ने के दौरान शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड अधिक बनने लगती है। तब मस्तिष्क श्वसन तंत्र को तेज गति से कार्य करने का निर्देश देता है। हृदय की धड़कन बढ़ जाती है, रक्त संचार तेज हो जाता है और पूरे शरीर को अतिरिक्त ऑक्सीजन मिलने लगती है।
इस प्रकार मस्तिष्क हर क्षण हजारों ऐसी क्रियाओं का संचालन करता रहता है जिनके बारे में हमें स्वयं भी जानकारी नहीं होती।
मस्तिष्क की संरचना
मस्तिष्क की महत्ता को देखते हुए प्रकृति ने इसे मजबूत अस्थियों से बने कपाल के भीतर सुरक्षित रखा है। इसके ऊपर तीन सुरक्षात्मक आवरण होते हैं, जिन्हें—
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वराशिका
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निराशिका
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चीनांशुक
कहा जाता है।
इन आवरणों के बीच विभिन्न स्थानों पर रिक्त गुहाएँ होती हैं, जिनमें एक विशेष प्रकार का द्रव भरा रहता है। यह द्रव मस्तिष्क को पोषण देने के साथ-साथ बाहरी आघातों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
आवरणों को हटाने पर मस्तिष्क का बाहरी भाग धूसर (Grey Matter) तथा भीतरी भाग श्वेत (White Matter) दिखाई देता है। इसकी सतह पर अनेक उभार और खाइयाँ होती हैं।
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उभारों को कर्णक (Gyrus) कहा जाता है।
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खाइयों को परिखा (Sulci) कहा जाता है।
यही संरचना मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाती है।
मस्तिष्क का आकार और वजन
मानव मस्तिष्क का औसत वजन लगभग 1.3 से 1.5 किलोग्राम होता है। इसका आकार कुछ-कुछ अखरोट जैसा होता है।
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छह वर्ष की आयु तक इसका विकास लगभग पूर्ण हो जाता है।
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इसमें लगभग 85 प्रतिशत पानी होता है।
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महिलाओं का मस्तिष्क सामान्यतः पुरुषों की अपेक्षा लगभग 100 ग्राम हल्का होता है, किंतु उसकी कार्यक्षमता में कोई कमी नहीं होती।
मस्तिष्क के मुख्य भाग
मानव मस्तिष्क को मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जाता है—
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मस्तिष्क मूल (Brain Stem)
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बड़ा मस्तिष्क (Cerebrum)
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मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
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लघु मस्तिष्क (Cerebellum)
1. मस्तिष्क मूल (Brain Stem)
मस्तिष्क मूल शरीर की जीवन रक्षक क्रियाओं का नियंत्रण केंद्र है।
यह निम्न कार्यों को नियंत्रित करता है—
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हृदय की धड़कन
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श्वास-प्रश्वास
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रक्तचाप
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फेफड़ों की गतिविधियाँ
हम चाहे जाग रहे हों या सो रहे हों, यह भाग निरंतर कार्य करता रहता है। यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के अन्य भागों के बीच संपर्क स्थापित करता है।
2. बड़ा मस्तिष्क (Cerebrum)
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाग है। यह कपाल के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है।
इसके दो गोलार्द्ध (Cerebral Hemispheres) होते हैं—
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दायाँ गोलार्द्ध
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बायाँ गोलार्द्ध
बड़ा मस्तिष्क निम्न कार्यों के लिए उत्तरदायी है—
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सोच-विचार
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स्मरण शक्ति
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निर्णय लेना
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भाषा
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भावनाएँ
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दृष्टि
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श्रवण
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स्वाद
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गंध पहचानना
मस्तिष्क में उपस्थित करोड़ों तंत्रिका कोशिकाएँ (Neurons) आपस में जुड़कर सूचना का आदान-प्रदान करती हैं। शरीर की लगभग सभी चेतन क्रियाएँ इसी भाग द्वारा संचालित होती हैं।
3. मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
मध्य मस्तिष्क बड़े और छोटे मस्तिष्क के बीच स्थित होता है।
इसके प्रमुख कार्य हैं—
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आँखों की गतिविधियों का नियंत्रण
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दृश्य संकेतों का प्रसंस्करण
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श्रवण संबंधी सूचनाओं का संचालन
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विभिन्न संवेदनाओं का समन्वय
यह शरीर की अनेक महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
4. लघु मस्तिष्क (Cerebellum)
लघु मस्तिष्क का मुख्य कार्य शरीर के संतुलन और मांसपेशियों के समन्वय को बनाए रखना है।
यह निम्न कार्यों में सहायता करता है—
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चलना
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दौड़ना
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खड़ा रहना
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शरीर का संतुलन बनाए रखना
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हाथ-पैरों की गतिविधियों में तालमेल
यदि यह भाग क्षतिग्रस्त हो जाए तो व्यक्ति सीधा चलने या संतुलन बनाए रखने में कठिनाई अनुभव करता है।
मस्तिष्क की कार्यप्रणाली
मस्तिष्क से 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial Nerves) निकलती हैं। ये तंत्रिकाएँ शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचकर संवेदनाओं का आदान-प्रदान करती हैं।
इन्हीं के माध्यम से हमें—
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सुगंध और दुर्गंध
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स्वाद
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स्पर्श
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ध्वनि
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प्रकाश
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तापमान
का अनुभव होता है।
मस्तिष्क के भीतर चार प्रमुख गुहाएँ (Ventricles) होती हैं, जिनमें विशेष प्रकार का द्रव भरा रहता है। यह द्रव मस्तिष्क को पोषण देता है और उसकी सुरक्षा करता है।
मस्तिष्क को रक्त की आवश्यकता
मस्तिष्क में रक्तवाहिनियों का अत्यंत घना जाल फैला हुआ होता है।
मस्तिष्क को निरंतर ऑक्सीजन युक्त शुद्ध रक्त की आवश्यकता होती है। यदि किसी कारणवश मस्तिष्क के किसी भाग में लगभग तीन मिनट तक रक्त न पहुँचे, तो वहाँ की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं और गंभीर शारीरिक क्षति हो सकती है।
इसी कारण स्ट्रोक (लकवा) जैसी स्थितियाँ अत्यंत खतरनाक मानी जाती हैं।
मस्तिष्क की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?
मस्तिष्क जितना शक्तिशाली और विलक्षण है, उतना ही कोमल भी है। इसलिए इसकी सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
निम्न कारण मस्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकते हैं—
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नशीले पदार्थों का सेवन
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शराब
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मादक दवाएँ
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अत्यधिक तनाव
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चिंता
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अवसाद
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मानसिक थकान
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पर्याप्त नींद का अभाव
लगातार मानसिक दबाव में रहने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के उपाय
मस्तिष्क को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए निम्न बातों का पालन करना चाहिए—
1. संतुलित आहार लें
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हरी पत्तेदार सब्जियाँ
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दूध
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घी
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ताजे फल
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मेवे
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अंकुरित अनाज
2. पर्याप्त नींद लें
प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद मस्तिष्क को पुनः ऊर्जा प्रदान करती है।
3. नियमित व्यायाम करें
योग, प्राणायाम और व्यायाम रक्त संचार को बढ़ाकर मस्तिष्क को स्वस्थ रखते हैं।
4. तनाव से बचें
ध्यान (Meditation) और सकारात्मक सोच मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।
5. नशीले पदार्थों से दूर रहें
नशा मस्तिष्क की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
निष्कर्ष
मानव मस्तिष्क प्रकृति की सबसे अनमोल देन है। यही हमारे विचारों, भावनाओं, स्मृतियों और व्यक्तित्व का आधार है। शरीर की प्रत्येक क्रिया किसी न किसी रूप में मस्तिष्क से नियंत्रित होती है। इसलिए इसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद तथा तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर हम अपने मस्तिष्क को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्रिय और शक्तिशाली बनाए रख सकते हैं।
"स्वस्थ मस्तिष्क ही स्वस्थ शरीर और सफल जीवन की आधारशिला है।"